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अनुकूल मौसम से इस वर्ष गेहूं की होगी रिकार्ड बोआई

नई दिल्ली । देश के मानसून मौसम के उतरार्द्व में हुई बारिश से चुनिंदा खरीफ फसलों को अवश्यक कुछ नुकसान पहुंचा है।बहरहाल अगले रबी फसलों को लेकर यह काफी फायदेमंद साबित होने वाला है।जिसके तहत पिछले वर्ष देश में रिकॉर्ड 10.21 करोड़ टन गेहूं उत्पादन का अनुमान रखा गया था।वहीं चालू फसल वर्ष 2019-20 के अगले रबी फसल मौसम को लेकर केद्र सरकार की तरफ से गेहूं पैदावार को लेकर 10.05 करोड़' टन का लक्ष्य रखा गया है।जिसके तहत विशेष रुप से इस वर्ष रबी फसल मौसम की प्रमुख फसल गेहूं की बोआई क्षेत्र बढने की उम्मीद की जा रही है।जिसको लेकर देश के कृषि वैज्ञानिकों की तरफ से कहा जा रहा है कि अगले रबी फसल मौसम के तहत देाि में गेहूं के उत्पादन का फिर एक नया रिकॉर्ड बनेगा। दरअसल भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के तहत आने वाले गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (आईआईडब्ल्यूबीआर) करनाल के निदेशक ज्ञानेद्र प्रताप सिंह ने कहा कि रबी फसल मौसम के तहत जैसा कि देखने को मिल रहा है यदि वैसा मौसम अनुकूल रहा तो पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष गेहूं का अधिक उत्पादन हेगा जिससे एक नया रिकॉर्ड बनेगा।उन्होंने पिछले वर्ष भी कहा था कि गेहूं के उत्पादन का आंकड़ा 10 करोड़ टन को पार कर सकता है।जिसको लेकर केद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की तरफ से जारी फसल वर्ष 2018-19 (जुलाई-जून) के चौथे उत्पादन' अनुमान के तहत देश में रिकॉर्ड 10.21 करोड़ टन गेहूं का उत्पादन हुआ है।यद्यपि चालू फसल वर्ष 2019-20 के अगले रबी फसल मौसम को लेकर केद्र सरकार ने 10.05 करोड़ टन गेहूं उत्पादन का लक्ष्य रखा है।बहरहाल पिछले दिनों हुई बारिश से गेहूं का रकबा बढ सकता हैजिससे गेहूं की उत्पादन में वृद्वि हो सकती है।उन्होंने कहा कि इस वर्ष रबी फसलों में विशेष रुप से गेहूं का रकबा बढ सकता है क्योंकि चना के बदले गेहूं की खेती में किसान अधिक दिलचस्पी ले सकते है।जिससे चने का कुछ रकबा गेहूं में स्थानांतरित हो सकता है।उन्होंने कहा कि इस वर्ष मानसून मौसम में भारी बारिश होने के चलते देश के जलाशयों में काफी पानी भरा हुआ है जिससे खेती की सिंचाई में काफी मदद मिलेगी।वहीं देश भर से आए ताजा रिपोर्ट के तहत देश भर के 120 जलाशयों में 151.9 अरब घनमीटर पानी है जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में सिर्फ 125.22 अरब घनमीटर पानी था।ऐसे में गेहूं की खेती में किसानों की दिलचस्पी की एक और वजह यह है कि रबी मौसम की एकमात्र फसल गेहूं है जिसकी सरकारी खरीद देश भर में होती है।जिसको लेकर सरकारी एजेंसी प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में किसानों से सीधे न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं खरीदती है।जिसको लेकर पिछले वर्ष केद्र सरकार ने गेहूं का एमएसपी 1840 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया थाजिसमें इस वर्ष पुन:वृद्वि होने की उम्मीद है।जिसको लेकर कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) ने रबी फसलों के एमएसपी को लेकर अपनी सिफारिश केद्रीय कृषि मंत्रालय को भेज दी है।जिसके तहत गेहूं का एमएसपी बढाकर 1925 रुपए क्विंटल करने की सिफारिश की गई है।देश में सबसे अगैती गेहूं की बोआई सबसे पहले मध्य प्रदेश,राजस्थान और गुजरात में शुरु होती है।ऐसे में पिछले दिनों हुई बारिश के चलते गेहूं की बोआई कुछ विलंबित हो सकती है।बहरहाल कृषि वैज्ञानिकों की तरफ से कहा जा रहा है कि खेतों में नमी अनुकूल है जिससें बोआई रकबा बढ सकता है। ''

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